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पहली एक फिल्म है, दुसरे एक बेहतरीन कलाकार थे जबकि तीसरा एक गाना है. सभी में एक बात सामान्य है, और वो ये की तीनो ही protagonist की नज़र से किसी चीज़ को देखते हैं न की वास्तविकता से. कला की यही बात तो उसे मनुष्य की एक बेहतरीन कृति बनती है! Mulholland Drive में सपने और हकीक़त आपस में चीनी और पानी की तरह घुल मिल जाते हैं, इतना ज्यादा की दोनों में भेद करना असंभव हो जाता है. यहाँ में पाठकों को Mulholland Drive ( Connie Stevens) के Sixteen reasons why I love you गाने की याद दिलाना चाहूँगा. Naomi Watts को लगता है की director उसी को देख रहा है, जबकि वो तो Laura Harring से इश्क फर्मा रहा होता है. पूरा दृश्य Naomi के दृष्टिकोण से फिल्माया गया है!

अब Van Gogh को लीजिये. Starry Night नाम की एक बेहद उम्दा चित्र में रात उमड़ती हुई प्रतीत होती है. तारे घुमते हैं, हवा हिल्गोचे खाती है , चाँद सूर्य से भी ज्यादा दीप्त है… सब कुछ चित्रकार के मन मैं है! लेकिन देखिये वो एक तारे की रात को कैसा अलोकिक बना देता है! मैंने लन्दन में जब इनकी बनाई दृश्यों को देखा तो ठगा सा रह गया !

आखिर में इश्क्यियाँ का गाना ” दिल तो बच्चा है जी”. निर्देशक ने पूरा गाना ऐसे फ़रमाया है की वो खालुजान ( नसीरुद्दीन ) की भावनाओ को दिखता है.. शायद विद्या बालन ने कोई मामूली सी बात नसीर को कही होगी, लेकिन नसीर के किरदार ने उसके अनेक मतलब निकाले.. नसीर का किरदार ‘कृष्णा’ को प्यार करता है और उसे लगता है की कृष्णा भी करती है.. “the heart easily believes what it wants to believe or what it is afraid to believe” .. ज़रा शब्दों पे गौर फरमाईये ..

“किसको पता था ,पहलु में रखा,
दिल ऐसा बाज़ी भी होगा.
हम तो हमेशा, समझते थे कोई ,
हम जैसा हाजी ही होगा
हाए जोर करे, कितना शोर करे
… बेवजह बातों पे ऐंवे गौर करे…
दिल सा कोई कमीना नहीं”
— गुलज़ार

अतृप्त मैं,
सुदीप्त तुम.
‘औ हमारे मध्य,
अकथ्य खालीपन..

 

( क्षोभ = sadness with a tinge of anger

अतृप्त = unsatisfied

सुदीप्त =  beautiful, bright 

अकथ्य = What couldn’t be said)

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