Fate or life is like the moon. जब चीज़ें बुरी चल रही तो होती हैं, तो वो बद से बदतर होती जाती हैं . जब अच्छी चलती है तो अच्छी से और बेहतर होती जाती हैं. चंद्रमा की तरह. और ये चक्र चलता जाता है. अच्छा - बहुत अच्छा - बुरा - बहुत बुरा - अच्छा.
मूर्ख हो तुम यदि सोचते हो की बुरी चीज़ें अच्छी चीज़ों के विपरीत समाप्त नहीं होंगी.
और विद्वान हो जो अगर इस बात को समझ कर न सुख में सुखी हो न दुःख में दुखी.
और जब तुम विद्वान् बन जाते हो, तो तुम्हे समझ आता है की गीता ये क्यूँ कहती है की ” कर्मन्यावाधिकरास्ते, माँ फलेषु कदाचन ”
और जब तुम्हे गीता सार समझ आ जाता है तो तुम बुरे - अच्छे से ऊपर उठ जाते हो. जैसा की Nietzche कहता है … तुम “Beyond good and evil” बन जाते हो.

