देव डी का गाना. बहुत ढूँढा लेकिन कहीं मिला ही नहीं. दुनिया इमोशनल अत्याचार को सुनती रहती है और सीपी (oyster)  में छुपे इस मोती को किसी ने देखा ही नहीं!!

 

उतरा उतरा मौसम ढलके

पलकों में

कतरा कतरा पी लूं

आ इस पल को मैं

(Katra = small drop of liquid) 

 

सूरज की कुछ बूँदें

टपकी हैं पेशानी(?) पे

सरगोशी खुद से करती हूँ,

मैं हैरानी में

(sargoshi  = whisper)

येही मेरी ज़िन्दगी है, ज़िन्दगी है, ज़िन्दगी ज़िन्दगी

येही मेरी ज़िन्दगी है, ज़िन्दगी है, ज़िन्दगी ज़िन्दगी

येही मेरी ज़िन्दगी है, ज़िन्दगी है, ज़िन्दगी ज़िन्दगी

येही मेरी ज़िन्दगी है, ज़िन्दगी है, ज़िन्दगी ज़िन्दगी

 

(music)

 

ये मेरे पल

मेरे दिन,

जैसे हों,

चंद सब्ज़ शाखें

एक शजर पे खिलीं.

( sabz = full of colour ,green ;   shajar = tree)

 

(हो)

है मेरे सब सपने रंग राज़

जीले भर के

जीवन में ले के उजाले

खिलखिलाते

मैं तो उड़ चली

कुदरत मुस्कराती है मेरी नादानी पे,

सरगोशी खुद से करती हूँ,मैं हैरानीमें

( naadani = naivity)

येही मेरी ज़िन्दगी है, ज़िन्दगी है, ज़िन्दगी ज़िन्दगी

येही मेरी ज़िन्दगी है, ज़िन्दगी है, ज़िन्दगी ज़िन्दगी

येही मेरी ज़िन्दगी है, ज़िन्दगी है, ज़िन्दगी ज़िन्दगी

येही मेरी ज़िन्दगी है, ज़िन्दगी है, ज़िन्दगी ज़िन्दगी

 

उतरा उतरा मौसम ढलके

पलकों में

कतरा कतरा पी लूं आ इस पल को मैं

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4 Responses
  1. अरे ऐसे कैसे छुप सकता है यह मोती दुनिया कि नजर से?
    हम तो शायद ही कभी इमोशनल अत्याचार सुनते है. हमे तो उससे इतर यही गाने पसन्द है.. :)

  2. nitin says:

    खुबसुरत शब्द चयन् ..

  3. aakanksha says:

    wow wat an awesome website its awesome dear i liked it vry much

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