Oh me!

We are so small between the stars & so large against the sky. and lost in subway croud, I try to catch your eye …..

अब जबकि तुम इस शहर में नहीं हो ( शरद बिलौरे )

April26

(कवि मात्र 25 साल के थे जब 1982 में लू लगने से उनका निधन हो गया. )

इस कविता को समझने के लिए प्रेम में होना (या किसी समय रहा होना ) आवश्यक है. साधू!

कविताकोश के साभार ली गयी है ये रचना.

===

हफ़्ते भर से चल रहे हैं
जेब में सात रुपये
और शरीर पर
एक जोड़ कपड़े

एक पूरा चार सौ पृष्ठों का उपन्यास
कल ही पूरा पढ़ा,
और कल ही
अफ़सर ने
मेरे काम की तारीफ़ की।

दोस्तों को मैंने उनकी चिट्ठियों के
लम्बे-लम्बे उत्तर लिखे
और माँ को लिखा
कि मुझे उसकी ख़ूब-ख़ूब याद आती है।

सम्वादों के
अपमान की हद पार करने पर भी
मुझे मारपीट जितना
गुस्सा नहीं आया

और बरसात में
सड़क पार करती लड़कियों को
घूरते हुए मैं झिझका नहीं

तुम्हें मेरी दाढ़ी अच्छी लगती है
और अब जबकि तुम
इस शहर में नहीं हो
मैं
दाढ़ी कटवाने के बारे में सोच रहा हूँ।

बादल और पौधे

June2

I just read this poem in the train. Monsoon is about to arrive… and
I find these words to be the most innocent expression of related
happiness

This poem has been taken from केदारनाथ अग्रवाल’s book – ” पंख और
पतवार”, published in 1980.

बादल और पौधे

पौधे,
बतियातें है पत्तों से,
बादल से कहते हैं-
आओ जी,
आओ जी,
आओ!

बादल,
धमकाते है बिजली से,
पौदों से कहते हैं-
ठहरो जी,
ठहरो जी,
ठहरो !

पौधे,
घबराते हैं गर्मी से,
बादल से कहते हैं-
बरसो जी,
बरसो जी
बरसो !

बादल,
घहराते है करुना से,
पौदों से कहते हैं-
पानी लो,
पानी लो,
पानी !

पौधे,
लहराते हैं लहरों से,
बादल से कहते हैं-
सागर है,
सागर है,
सागर!

एक आम दिन

February8

आज कैसा ऊंचा और नीचा दिन निकला! सुबह bank का collections कैसे काम करता है, ये देखने निकल पड़ा. Auto से गया. ऑटो वाले से मैंने ठीक से बात की. जब उतर के पैसे दिए तो उसने कहा, “Sir, आप असली Gentleman हैं. ” मुझे ये ये बहुत अच्छा compliment लगा. एक अरसा हुआ जब किसी ने बिना किसी छुपी आकांक्षा के कुछ अच्छा कहा मेरे बारे में.

फिर collection agent के साथ निकल पड़ा. ये ऐसे लोग थे जिन्होंने 2 साल से पैसा नहीं दिया था. कुछ तो साफ़ बेईमान दिखे , कुछ बेचारे शरीफ भी थे. एक पान वाले एक पास गया जिससे पता चला की उसे फसाया हुआ है किसी ने. बेचारे के ऊपर कानूनी केस भी लगा दिया है ICICI ने ! दू:खी प्राणी ने पहले तो अपना मामला साफ़ किया फिर मेरे को cold drink भी पिलाई, मुफ़्त में. मैंने पुछा की भाई अगर तुमने लोन लिया ही नहीं था तो इतनी किश्त क्यूँ चुकी? वो बोला, ” सर दोस्त ने कहा था की बचा ले”. उसके अपने दोस्त ने उसे fraud केस में फसवा दिया और वो बेचारा उसी को बचाने चला है..

वापस आके दफ्तर में डांट पड़ी की मैंने काम नहीं किया है. मेरी कोई गलती नहीं लगी अपने को. पर कुछ कहा नहीं. Boss ने एक काम करने को कहा, मैंने कहा की सर ये काम दूसरी तरह से करना चाहिए. बॉस ने डांट दिया. मैंने अपनी बात समझाई जो आज field से सीख कर आया था, तो मान गए वो मेरी बात. मुझे अच्छा लगा की चलो आज इतनी मेहनत करने के बाद, कुछ तो ऐसा सीखा की discussion में अपना point defend कर सकूं.

वापस आ के देखा तो फिनलैंड की internship देने से मना कर दिया है. सोचा की कोई न, जीवन में अच्छी चीज़ें भी होती हैं और बुरी भी. आज दरवाज़ा बंद हुआ है, कल कोई और खुलेगा. भगवान् भी आखिर कितना काट सकता है मेरा?

और आखरी में साहब एक SMS आया जिसपे गौर फरमाएं – ” It is not the friend who should be perfect, it is the friendship that should be perfect” .. कितनी सही बात है , है न?
———
छिप-छिप अश्रु बहाने वालों, मोती व्यर्थ बहाने वालों
कुछ सपनों के मर जाने से, जीवन नहीं मरा करता है
— गोपालदास ‘नीरज’

अपने बारे में

February8

अगर मेरी कोई पहचान है, तो वो ये की मैं बहुत सारी बातों को appreciate कर सकता हूँ. फ़क़त इस चीज़ के, वरुण अग्रवाल में और कुछ भी नहीं है जो उसे अपनी सारी कमजोरियों और मूर्खताओं से बर्बाद होने से बचाता है.
..
धन्यवाद् प्रभु, तुमने कुछ तो अच्छा दिया मुझे!

Why Buddy is Buddy and why no one can be like Buddy

November2
Buddy with Chivas

Buddy with Chivas

Perhaps even more difficult than the search for the Goly Grail, the search of El Dorado, The search of the fountain of Youth is the Question – “Why Buddy is Buddy and why no one can be like Buddy?”

For those of you who don’t know him, Buddy ( Parmeet Singh) is 25/M/Weird/Witty/Engineer/Doing-good-at-job. He was my classmate for 4 years in Punjab Engineering College, Chandigarh (PEC) For the First three years , I found him to be the most weird guy of 2002-06 Electrical Engineering. But in the fourth year my opinions did a volte-face. During a trip with him ( and the class) to Nathpa-Jhakri I realized he was smart, intelligent, funny and good at heart.

Buddy often does things I can not even imagine to do in my weirdest dream. He’s tired of Cities? Ok He’ll go to Chitwan and valley of flowers for 10 days. He’ll go on a trip to a forgotten hamlet in Maharashtra where he’ll only have coconuts and fishes.  He is missing his parents? Ok, He’ll take them to pondicherry on a week’s notice. He’s feeling artistically challenged? Ok, he’ll learn the guitar.He’s feeling lonely? Ok, He’ll talk to every single man/woman/in-between in a bus in some obscure village of Thailand and will make them friends in 5 mins flat. A dog’s barking at him? Ok, He’ll go and pet it and give him a biscuit and within minutes buddy has found a new buddy.

Buddy is the only person who can visit each and every village of Kinnaur district and distribute sweets  like a Santa Claus. Buddy is the only guy who’ll  complete the half marathon of 21 KM  Buddy , After only one day’s practice,  In the most bizarre haircut possible, And with a peg of Chivas Regal in hand

Buddy is buddy and no one can be like buddy because we all are so engrossed in making our tomorrows better that we forget today. We all are like those rats who’ll starrve today to keep storing food for tomorrow. That tomorrow never comes. And we all remain rats.

We all are in pursuit of happiness…..While buddy is happy exactly because he’s not in pursuit of happiness .Buddy and me in Nainital ( Diwali, 2009)

एक ख़ुशी भरा दिन

August1

आज तो अच्छा दिन निकला ! पहले खूब सारा काम था re rating का . मैंने बहुत अच्छी तरह से conference call कर के वो सोल्वे किया…अज्ज मैंने बहुत सारे लोगों से फोन पे बात की और मुझे ऐसा लगा की आज मैं सच में कोई manager वाला काम कर रहा हूँ.. खूब कहा लोगों से, ” SO when are you giving me the job…No no, ….monday is too late, lets do it by today evening!” फिर खूब लोगों के काम solve किये, अच्छा लगा :)

फिर 5 बजे baskin Robins गए जहाँ 31% discount offer था … छक कर Brownie Sunday खाया :) ६ बजे gym गया. सोचा आज कम से कम 15 minute दौडूंगा, लेकिन 30 minute तक दौड़ा. उसके बाद weights किये !

वापस आया तो देखा फोन खो गया था . बहुत परेशान हुआ. ढूँढा नहीं मिला. फिर सुदिप्तो ने कहा उन्हें किसी ने दे दिया था… अच्छा लगा :)

उसके बाद उनसे 1 घंटा गप्पें मारीं घर पहुंचा तो पता चला की पापा मम्मी आने वाले हैं, और मेरी monday Tuesday की छुट्टी approve हो गयी है… अब ख़ुशी ख़ुशी उनके साथ घूमोंगा..

और हाँ, कल महाबलेश्वर जा रहा हूँ :) :) बताओ, क्या जीवन सुखद नहीं है??

सराहना – Appreciation

May28

मुझे Internet लेना था अपने computer पे, और एक काम के लिए मैं अजमेर के Airtel office पे गया. वहां एक बन्दे ने बताया की आप 395/- देके Internet ले लीजिये. वहीँ पे एक और employee बैठी थी. उसने कहा, sir आप पहले एक सस्ता plan लेके speed देखिये, और अगर अच्छा लगे तो फिर बढ़िया plan ले लेना. उसकी बात मेरे को जची. वो बात मानने से मेरा फायदा भी हुआ. फिर मैंने २- ३ बार उसे फोन भी किया, और उस employee ने मेरी पूरी सहायता की. मुझे बहुत अच्छा लगा और मैंने कहा की क्या कोई appreciation book है यहाँ पे? वो कोई 100 पन्ने की किताब थी, और आज तक उसमे एक भी customer ने किसी को commend नहीं किया था. Ms पूजा ने कहा, ” sir, आप पहले हो जो की हमारे काम की सराहना कर रहे हो. बाकी सब तो issue solve करवा के चल देते हैं”

 —

मुझे अपने भाई गोलू की एक बात पसंद है, वो हमेशा ‘thank you’ कहेगा. चाहे वो एक छोटी सी गुलरभोज की दूकान पे जाये या चाहे दिल्ली के McDonald पे, उसकी ये बात नहीं बदलेगी. अगर में कभी उसे पानी का ग्लास दूँ, तो वो मुझे भी thanks कहेगा. कुल मिला के वो शिष्टाचारी है.और ये एक अच्छी बात है. अगर हम किसी की उसके अच्छे कार्य के लिए सराहना करें, तो हमारा कुछ नहीं जायेगा. लेकिन सामने वाला इससे बहुत प्रसन्न होगा और उसे लगेगा की वह केवल एक machine नहीं अपितु एक इंसान है. लोग america जाते हैं और पाते हैं की वो एक अलग दुनिया है. क्या कहीं उसके अलौकिक मानवीय पक्ष का Appreciation एक बड़ा कारण तो नहीं?

 

 

(On an entirely different note my Mummy, who is in get-varun-married-mode, said she liked that girl and should she ask her to go on a date with varun 😛 )

छवि

March30

” तुम ideal husband material हो.”, मुझसे उसने matter-of-factly तरीके से कहा.

मेरा केक मुह में ज्यों का त्यों रह गया

“क्या मतलब है तुम्हारा?” अपना केक चबाते हुए मैंने पूछा.

” मतलब की .. जैसे कुछ लोग होते हैं जो boyfriend material होते हैं, उनके साथ मज़ा तो काफ़ी आता है लेकिन घर पे… मिलाया नही जा सकता , समझ रहे हो न तुम? ” उसने बेबाक विचार व्यक्त किए.

मैं , जो केक खाने में अभी तक व्यस्त था , इस बात के बारे में सोचने लगा. यहाँ मैं बताना चाहूँगा की मैंने कभी अपने बारे में इस नज़रिए से नही सोचा. मैं कैंटीन में हमेशा केक में ज्यादा दिमाग लगता हूँ और अपनी छवि पे कम. मुझे लगता है की यह चीज़ मुझे भ्रम से बचाती है , ये अलग बात है की रोज़ रोज़ केक मेरे वजन को रहस्यमई तरीके से बढ़ा रहा है.

” इसे मैं comment समझूँ की compliment?” , मैंने पूरी सच्चाई से पूछा.

“obviously, compliment था ” , उसने कहा

उसकी आंखों में और उसकी बातों के मतभेद को अगर मैं अनदेखा कर दूँ, तो कहूँगा की मुझे अच्छा लगा.

“The Art of saying Goodbye”

July9

♂ “Bye”
♀ “What’s that?”
♂ “Kya ‘what’s that?’”
♀ “I mean, that’s not the way to say goodbye!”
♂ “Really? Then what is?”
♀ “You first make a context, then taper off the conversation, and finally say ‘bye’ as a fitting finish”
♂ “Duh??”
♀ “Arre, look at me. I ask how’s the weather, then I talk about….”
♂ (Interrupting) “Hey wait a minute! We already discussed about the weather in Mumbai”
♀ (Gives me an exasperated sigh) “OK. So talk about a movie, about parents, about a collegue”
♂ “There is no interesting Hindi movie going on, nothing happens in my parents lives, My dog is too dumb to be talked about & you know how bad I am at gossiping about people”
♀ “your IQ might be 170, but your EQ is surely in single digit”
♂ “Umm… I don’t know”
♀ “You’re Stupid. Chow!”
♂ “that’s ‘Chow’ all right but that isn’t Ciao.”
♀ “what do u mean its chow but not chow”
♂ “I mean its C-I-A-O but pronounced as Chow, Italian you know”
♀ (blushes) “oh! hi hi …you know my spellings na”
♂ “by my superior IQ I have just calculated that this phone call has already costed you Rs 43 and if we didn’t have this last piece of conversation, you would have saved Rs 5..”
♀ “click”
(call ended)
♂ (To myself) “That’s the secret of the art of saying goodbye”

मास्टर जी

April22

जब मैंने 3 हफ्ते पहले गणित पढाना शुरू किया था, बुआ के घर पर मैंने कहा,” मेरे को क्या मतलब बच्चों से? मेरा जब मूड करेगा तब मैं उन्हें छोड़ दूँगा। येही सीखा है मैंने IIFT से।”

आज जब मैं आखरी दफा उनसे मिला, तो मेरा मन दुखा। इन 3 हफ्तो में ये लोग मेरे मित्र बन चुके थे। मैं जब इनके साथ होता तो मुझे मेरे स्कूल के दिन याद आते थे। Sweetness और innocence इनमे अभी तक बची हुई थी। भोलापन बाकी था। मुझ पर आसानी से विश्वास करते थे। मुझे भी इन्हे पढ़ाते हुए लगता कि जैसे इशा या फिर अपने किसी छोटे भाई को पढ़ा रहा हूँ। हम क्लास में मजाक करते थे और समय समय पर मैं उन्हें डांट भी देता था। कभी मैं नाराज़ होता तो वो भी चुप हों जाते थे, कभी उनसे सवाल नही हल होते तो मैं अपनी पूरी कोशिश करता उन्हें समझाने कि। बहुत सारे प्यारे किस्से हुए, उनमे से कुछ ये हें –http://is-was-willbe.blogspot.com/2008/04/8-april-tuesday.html और http://is-was-willbe.blogspot.com/2008/04/18-april-friday.html

मैं जब उन्हें पढ़ा के आता तो मुझे प्रसन्नता होती कि मैंने आज किसी को कुछ दिया है। मुझे अच्छा लगता कि मैं ऐसा काम करता हूँ जिससे कि किसी का बुरा नही होता, सबका भला ही होता है। कहाँ Investment Banking कि अंधी नौकरी जहाँ 95 % किसी न किसी का नुकसान होता ही है, और कहाँ ये job जहाँ रात को सोते वक्त मुझे चैन कि नींद आती है!

कल जब मैं बच्चों को पुरस्कार देने के लिए choclate खरीद रहा था, तो अमन ने पूछा,” क्यों senti होते हों उनके लिए? क्या फर्क पड़ता है उनसे? क्यों फालतू में पैसे खर्च करते हों?”

हाँ, कुछ नही लगते थे वो मेरे। लेकिन तब भी जितना IIFT मैं 2 साल मैं मुझे कुल आनंद नही मिला, उससे अधिक अपनापन इन 3 हफ्तो मैं पटेल नगर के बच्चों ने दिया। शुक्रगुजार हूँ मैं आपका!

बाबा और अम्मू

January20

ESNIPS पे “हम लायें हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के ….” गाना सुनते हुए याद आया कि छब्बीस जनवरी पास आ गयी है। याद आया कि फिर से स्कूली बच्चों को जबरदस्ती राजपथ ले जाया जाएगा और मैं ख़ुशी ख़ुशी सोचूंगा कि चलो एक छुट्टी और मिली।

तभी याद आया कि मेरे दादाजी (बाबा) और दादीजी (अम्मू) भी शामिल थे स्वतंत्रता सेनानियों में और अनगिनित गांधीवादियों कि तरह उनके भी जेल जान पड़ा था। दोनो कि तबियत भी काफी खराब हुई थी उस दौरान। बाबा और अम्मू दोनो ही संपन्न परिवारों से ताल्लुक रखते थे और उन्हें कोई आवश्यकता नही थी अपने स्निग्ध जीवनशैली त्याग के ,जेल के एक बैरक में बासी रोटी और अधपकी दाल खाने की। लेकिन उन्होने ऐसा किया, कुछ अपनी पीढ़ी के लिए, कुछ मेरी पीढ़ी के लिए और कुछ मेरी आने वाले पीढियों के लिए।

बाबा अब नही रहे, अम्मू से अगर पूछों कि आपने क्यों इतना त्याग किया तो वो कहेंगी कि उस समय का उन्माद ऐसा ही था। वे कहेंगी कि कुछ इतनी बड़ी बात भी नही थी। किन्तु जिस चीज़ के लिए आपने इतनी मेहनत की, उस की कीमत हम में से कोई न समझा।

एक PEPSI पीते , McD का burger खाते और GRE देके पहले मौक़े में अमरीका जाते हुए आपके अयोग्य पौत्र की ओर से शत् शत् नमन .

My first Post

November22

Decadence is setting in. My ideas & ethics are dying and am everyday getting more and more materialistic.

A number of thoghts cross my mind everyday. This is an attempt to word my emotions on a gamut of things.

If you’re here to find some fun stuff, you’ll be dissapointed. This is meant to be more of a chronicle rather than an intellectual/entertainment portal!

However, if you’re here to see what have i been up to; you’re more than welcome.

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