Oh me!

We are so small between the stars & so large against the sky. and lost in subway croud, I try to catch your eye …..

स्मृति

February7

भागता गया मैं
रात और दिन
उत्तर दक्षिण , पूरब पश्चिम

हिंदुस्तान से अमरीका
अमरीका से कंबोडिया
कैम्ब्रिज से नेटिक
और फिर नेटिक से कैम्ब्रिज
रटगर्स से हार्वर्ड
रेड लाइन से ग्रीन लाइन
एटलांटिक से प्रशांत
दिन प्रतिदिन
मौसम से मौसम
साल प्रति साल

मैंने मदद मांगी
फूलों से और पेड़ों से
नदियों से, पहाड़ियों से
मेपल से ओक से
कल्पतरु से
सूरज की किरणों से
ब्रह्माण्ड क नक्षत्रों से

कोई न बचा पाया
कोई न छुपा पाया
तुम्हारी स्मृति से

तुम्हारी यादें
काल और समय की
सीमाओं को नहीं पहचानती
वे स्वयं
ईश्वर से हार नहीं मानतीं

 

( Cambridge, 7 Feb 2016 )

हफ्ते भर

December2

हफ्ते भर तुम्हारी याद आती रही
हफ्ते भर नींद से मुझे जगाती रही
कितनी कोशिश की , भाग जाऊं कहीं बहुत दूर
लेकिन फांसी के फंदे जैसी
मेरा रुँधा गला दबाती रही.

( Boston, 3 Dec 15 )

वो हमसफ़र था

October23

Qurat-u-lain Baluch has rendered a beautiful version of this song by Abida Parween for coke studio. The original nazm was meant to capture the emotions fet by the divided east Pakistan – west Pakistan population, after the 1971 war which saw the creation of Bangladesh. It has been penned down by Naseer Turabi

These days, it has been synonymous with the memories that remain after a divorce.

My translation of certain words is in english…

 

वो हमसफ़र था मगर उस से हमनवाई न थी
के धूप छाँव का आलम रहा, जुदाई न थी

humsafar: fellow traveller ( used  for spouse )

humnavai: the feeling of being together,

अदावतें थीं, तग़ाफ़ुल था, रंजिशें थीं मगर
बिछड़ने वाले में सब कुछ था, बेवफ़ाई न थी

adawatein : anger

tagaful: inconsiderateness

rangish: anguish

bewafai : infidelity

न अपना रंज, न अपना दुख, न औरों का मलाल
शब-ए-फ़िराक़ कभी हम ने यूँ गँवाई न थी

shab-e-firaq : the night of separation

बिछड़ते वक़्त, उन आँखों में थी हमारी ग़ज़ल
ग़ज़ल भी वो जो किसी को अभी सुनाई न थी

मुहब्बतों का सफ़र कुछ इस तरह भी गुज़रा था
शिकस्ता-दिल थे मुसाफ़िर, शिकस्ता-पाई न थी

Shikasta dil : defeat of heart

shikasta pai : defeat of feet ( to give up walking )

( Naseer Turai, 1971 (?) )

 

 

संधी – विच्छेद

June3

जब छोटा था,
तब से ही हिंदी बेहद पसंद रही
हिंदी व्याकरण मैं भी अच्छा रहा.

संधी करना हमेशा सरल लगा,
जब पांचवी कक्षा में था,
तब भी आठवीं के एक दोस्त को
परीक्षा में नक़ल करवायी थी
बताया था
की विद्या + आलय
है विद्यालय बन जाता
और फिर दसवीं के बोर्ड में
पूरे राजस्थान में हिंदी में
अव्वल था आया

मुझे हमेशा लगता रहा संधियाँ करना आसान है
लेकिन अमरीका आकर पता चला
208 कैंब्रिज स्ट्रीट पर
नहीं आता मुझे संधियाँ करने का भेद
न आता संधि करना
और एक साल बीतने बाद भी
नहीं आता संधी – विच्छेद

( बोस्टन, 2 जून 2015 )

A quote

May12

” Our faith in the present dies out long before our faith in the future.”

– Ruth Benedict (1887 – 1948 ) , Anthropologist

Protected: The suitcase

February21

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Protected: What I realized 11/18/14

December4

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तुझसे नाराज़ नहीं ज़िन्दगी…

September21

तुझसे नाराज़ नहीं ज़िन्दगी, हैरान हूँ मैं
ओ हैरान हूँ मैं
तेरे मासूम सवालों से परेशान हूँ मैं
ओ परेशान हूँ मैं

जीने के लिये सोचा ही न था, दर्द सम्भालने होंगे
मुस्कुराऊँ तो, मुस्कुराने के कर्ज़ उठाने होंगे
मुस्कुराऊँ कभी तो लगता है
जैसे होंठों पे कर्ज़ रखा है
तुझसे …

आज अगर भर आई हैं, बूँदें बरस जायेंगी
कल क्या पता इनके लिये आँखें तरस जायेंगी
जाने कहाँ गुम कहाँ खोया
एक आँसू छुपाके रखा था
तुझसे …

ज़िन्दगी तेरे ग़म ने हमें रिश्ते नये समझाये
मिले जो हमें धूप में मिले छाँव के ठंडे साये
ओ तुझसे …

 

( Gulzaar, C. 1980s , from the movie, “Masoom”) . This has been taken from here.

घर छोड़ना

August22

“निकलना खुल्द से आदम का सुना था हमने,
पर बड़े बे-आबरू हो तेरे कूचे से हम निकले (ग़ालिब )”

—  —   —   —  —  —   —

 

ज़्यादा समय नहीं लगता
अपना बोरिआ बिस्तर बाँधने में

कुल जमा एक अलमारी का सामान है
और दो सूटकेस काफी हैं
अपनी किताबों, कपड़ों, डाक टिकट
डायरी और जूते रखने के लिए

आधे घंटे सामान रखो
और ज़िन्दगी भर सोचते रहो
क्या छोड़ आया, क्या ले आया

ढाई बजे की धुप मखमली है
चार्ल्स नदी सतत बहती है.

 

( Boston, 8/22/2014 )

आलिंगन

December4

तुमसे नाराज़ हो , मैं सोचता हूँ
कितनी खरी खोटी सुनानी है तुम्हे
कितना लड़ना है
कितना ह्रदय दुखाना है तुम्हारा ….

लेकिन शाम मैं घर आता हूँ
और तुम आलिंगनबद्ध करती हो मुझे ….
मैं भूल जाता हूँ
अपने आप से किये वादे
आह ! मैं दुःखी न रह पाता हूँ
अपने को तुम्हारे प्रेम में बावरा पाता हूँ।

 

( Boston, 3  Dec 2013 )

 

Of Indian horoscope based marriages

April29

F*** Y** Indian caste and horoscope system. You put more weight into a man’s time of birth than his character, more importance in his surname than his credentials, more thought on his God than his ethics, more scrutiny into his sun-sign than his ability to excel at work.

F*** Y** all ye ladkewale. You will go to a pundit to tell you if you should marry a person because you are too stupid to even understand what a janamkundli means. You wont even know why are you doing it.. you wouldn’t know which scripture tells you to do it, yet you will do it. Because you are so shit scared that something will go wrong you don’t want to take a risk. Then of course you will demand obscene amount of dowry because after all that’’s a ladkewala’s birthright.

F*** Y** all ye ladkiwale. You will educate your girl only because you want her to be a “blend of traditional and modern values”. You won’t let her find love because dating-is-oh-so-bad. Then you will force her to marry  a guy who is rich, whose “parents are somebody” and who doesn’t drink or smoke. (“What, he drinks a beer? Oh wo to bahut bigda hua hai. Pata nahi duniya ko kya ho gaya hai aajkal”)

F*** Y**, all ye marriage ceremonies with vulgar and gaudy display of money. Where both parties try to project what they are not, spending lakhs on just another night’s entertainment. With the pandit again coming and chanting shlokas that no one has an idea about. And with the pundit demanding copious amounts of money during the ceremony, you will exchange varmalas at 2 AM in night – with no guests present, all relatives asleep and you ready to perpetuate the cycle.

I hate it.

Protected: Of being ready for marriage

June18

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सम्बन्ध by आभा बोधिसत्त्व

April15

यह कविता “कविताकोश” से ली गयी है. आभा बोधिसत्त्व जी दांपत्य जीवन के मर्म को समझती हैं, इस कविता के द्वारा….

चलो हम दीया बन जाते हैं
और तुम बाती …

हमें सात फेरों या कि “कुबूल है” से
क्या लेना-देना

हमें तो बनाए रखना है
अपने दिया-बाती के
सम्बन्ध को……… मसलन रोशनी

हम थोड़ा-थोड़ा जलेंगे
हम खो जाएँगे हवा में
मिट जाएगी फिर रोशनी भी हमारी
पर हम थोड़ी चमक देकर ही जाएँगे
न ज़्यादा सही कोई भूला भटका
खोज पाएगा कम से कम एक नेम-प्लेट
या कोई पढ़ पाएगा ख़त हमारी चमक में ।

तो क्या हम दीया बन जाए
तुम मंजूर करते हो बाती बनना।
मंजूर करते हो मेरे साथ चलना कुछ देर के लिए
मेरे साथ जगर-मगर की यात्रा में चलना….कुछ पल।

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शेष होते हुए

December16

A beautiful poem on ending relationships/ divorce by Govind mathur. This has been taken from Kavitakosh. This poem and the collection) got the poet Rajasthan Sahitya Academy award in 1986.

A simple poem, but very deep. Mr Mathur blogs at http://www.govind-mathur.blogspot.com/

इस तरीके से नही
पहले हमें
सहज होना होगा
किसी तनाव में
टूटने से बेहतर है
धीरे-धीरे
अज्ञात दिशाओं में
गुम हो जाएँ

हमारे सम्बन्ध
कच्ची बर्फ से नही
कि हथेलियों में
उठाते ही पिघल जाएँ
आख़िर हमने
एक-दूसरे की
गर्माहट महसूस की है

इतने दिनों तक
तुमने और मैंने
चौराहे पर खड़े हो कर
अपने अस्तित्व को
बनाए रखा है
ये ठीक है कि
हमें गुम भी
इस ही
चौराहे से होना है

पर इस तरीके से नही
पहले हमें
मासूम होना होगा
उतना ही मासूम
जितना हम
एक दूसरे से
मिलने के पूर्व थे

पहले मैं या तुम
कोई भी
एक आरोप लगाएंगे
न समझ पाने का
तुम्हें या मुझे
और फिर
महसूस करेगें
उपेक्षा
अपनी-अपनी

कितना आसान होगा
हमारा अलग हो जाना
जब हम
किसी उदास शाम को
चौराहे पर मौन खड़े होंगे

और फिर जब
तुम्हारे और मेरे बीच
संवाद टूट जएगा
कभी तुम चौराहे पर
अकेले खड़े होगें
और कभी मैं

फिर धीरे-धीरे
हमें एक दूसरे की
प्रतीक्षा नही होगी
कितना सहज होगा
हमारा अजनबी हो जाना
जब हम सड़कों और गलियों में
एक दूसरे को देख कर
मुस्करा भर देंगे
या हमारा हाथ
एक औपचारिकता में
उठ जाया करेगा

हाँ हमें
इतनी जल्दी भी क्या है
ये सब
सहज ही हो जाएगा
फिर हमें
बीती बातों के नाम पर
यदि याद रहेगा तो
सिर्फ़
एक-दूसरे का नाम

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Protected: फोन

August2

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Top 10 signs that you are activated on a matrimonial site

June22

10) You stop completing your linkedin profile and start worrying about xyzmatrimony.com

9) While taking a picture you start thinking of making it a abcmatrimony profile pic rather than a FB profile pic.

8) You start noticing people’s surnames – something you never did in the past 27 years of your life.

7) You realize that now in addition to preparing, “Why do you want this job?” you also have to prepare, “What do I expect from my life partner?”

6) The girl who sits in the next cabin starts looking OK to you.

5) (Almost) Every ‘correct age’ unmarried women starts being judged from a is-she-ok-for-me point of view

4) You start realizing that all your ex-girlfriends weren’t that bad after all.

3) You moods begin alternating between being S*** scared and irrational exuberance(and I dont mean that in an Alan Greenspanish way)

2) Every time your mom calls up, you feel the consternation that she’ll either mention a new ‘rishtaa’ or ask, “Bhaiyyu, did you find someone on xyzmatrimony?”

1) You are undecided that which of the above 9 points should be ranked numero uno, for all of them are as weird and as true as it gets.

hagar

विवाह

July14

तुम और मैं
सशंकित प्रतिनिधियों के चुने,
असीमित संभावनाओं
की कसौटी पर खरे,
लेकिन एक दुसरे से
डरे डरे.
भय से अधमरे.

 

[ सशंकित – unsure

प्रतिनिधियों – representative

असीमित संभावनाओं = infinite possibilities

कसौटी = stone with which a goldsmith ascertains the purity of gold

खरे = passed ]

छवि

March30

” तुम ideal husband material हो.”, मुझसे उसने matter-of-factly तरीके से कहा.

मेरा केक मुह में ज्यों का त्यों रह गया

“क्या मतलब है तुम्हारा?” अपना केक चबाते हुए मैंने पूछा.

” मतलब की .. जैसे कुछ लोग होते हैं जो boyfriend material होते हैं, उनके साथ मज़ा तो काफ़ी आता है लेकिन घर पे… मिलाया नही जा सकता , समझ रहे हो न तुम? ” उसने बेबाक विचार व्यक्त किए.

मैं , जो केक खाने में अभी तक व्यस्त था , इस बात के बारे में सोचने लगा. यहाँ मैं बताना चाहूँगा की मैंने कभी अपने बारे में इस नज़रिए से नही सोचा. मैं कैंटीन में हमेशा केक में ज्यादा दिमाग लगता हूँ और अपनी छवि पे कम. मुझे लगता है की यह चीज़ मुझे भ्रम से बचाती है , ये अलग बात है की रोज़ रोज़ केक मेरे वजन को रहस्यमई तरीके से बढ़ा रहा है.

” इसे मैं comment समझूँ की compliment?” , मैंने पूरी सच्चाई से पूछा.

“obviously, compliment था ” , उसने कहा

उसकी आंखों में और उसकी बातों के मतभेद को अगर मैं अनदेखा कर दूँ, तो कहूँगा की मुझे अच्छा लगा.

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