Oh me!

We are so small between the stars & so large against the sky. and lost in subway croud, I try to catch your eye …..

Protected: The fundamental theorem of the career confused

December1

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मैं नहीं समझ पाता

June28

ये कोई आवश्यक तो नहीं
की हर बार जब तुम मुझसे मिलो
तुम कुछ ऐसा करो
की मेरा विवादित मन निरुत्तर हो जाए

क्यों तुम हो जाती हो भावुक
करुणा से भर
जब मैं होता हूँ दुखी

भला क्यों तुम मुझसे
करती हो इतना प्रेम
मुझे नहीं समझ आता
असमंजस में ये दिन बीता जाता

 

( Yale University, New Haven : 6/27/2015 )

Protected: मिलना और खोना

November26

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सफलता

March12

मैंने अभी अभी पॉल सिंगर का annual  letter पढ़ा। सिंगर ने Forbes 400 की सूची का अन्वेक्षण करने पर पाया की 2012 में 64% Billionaires  self-made थे। अर्थात जो कल सबसे अमीर थे वे आज नहीं हैं। बेशक जो आज हैं वो कल नहीं रहेंगे।

हम successful  क्यूँ नहीं हैं? इसके अनेक कारण हो सकते हैं। लेकिन जो कारण मुझे सबसे ज्यादा important  लगता है वो है की हम मेहनत नहीं करते। ये, और दूसरा की हम risk नहीं लेते। हमे जो मिला उसमे हम खुश हैं। हमे लगता है की ये कितनी बड़ी बात है की सर पर छत, खाने को रोटी और पैर में जूता है। हमें रहने को ताज, खाने को मिठाई और पैर में Ferrari नहीं चाहिए। भगवन ने जो दिया, सो अच्छा।
मुझे नहीं लगता की भगवन ने संतुष्ट होने को कहा है। गीता में प्रभु बार बार कहते हैं – कर्म करो। कर्म करो का अर्थ हुआ पूरी पूरी इमानदारी से कर्म करो। इमानदारी से कर्म करने का ये भी अर्थ है की अगर 5 काम मिले तो पांचो को सर्वोत्कृष्ट तरीके से करो। दूसरों का तो पता नहीं, लेकिन मैं ऐसा नहीं कर रहा हूँ। बस उतना करता हूँ की काम चल जाये। अपनी ओर  से कुछ ज्यादा  नहीं कर रहा। सुबह office पहुंचा तो पहले देखा की boss  आया है की नहीं। boss  से पहले पहुँचने में ही आधी सुबह निकल रही है। दुपहर घर पहुँचने की इच्छा में व्यतीत हो रही है। लड़कियों से बात करने में रात बीते जाती है। जीवन बस निपटाया जा रहा है, जिया नहीं जा रहा। कर्म नहीं किया जा रहा है। धर्म नहीं किया जा रहा है।
भगवन ने अकल दी है, ये बात मुझे पता है। सोचने समझने की शक्ति दी है। वो परिस्थितियां भी दी हैं की सफलता मिले। मसलन   ऐसे परिवार में पैदा किया की पढने लिखने पे जोर था, और स्वतंत्रता थी की जो चाहे करो। चाहो तो खेलो, चाहो तो पढो, चाहो तो लिखो। बाद में भी किस्मत ठीक ठाक ही रही की अच्छी जगह पढने को मिला और अच्छी जगह नौकरी मिली।
तो अब क्या हुआ? अब क्यूँ रुक गया हूँ मैं?
आलस्य ने डस लिया है। आराम की बुरी आदत पड़  गयी है। कर्म छोड़ दिया है, माया में खो गया हूँ।
धिक्कार!!

Protected: Of being ready for marriage

June18

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अच्छा और बुरा

October19

क्या अच्छा है, क्या बुरा? आजीवन सोचता रहूँ तब भी किसी नतीजे पे नहीं आ सकता. जैसे की मेरे घर के बाहर लगा maple का पेड़. जब कोई interview call आती है और मेरे पैरों में उछाल होता है, तब वो कितना प्यारा दीखता है. जब कोई मुझे नकारता है और मैं ज़मीन में गढ़ा जाता हूँ, तब वो कैसा मरणासन्न लगता है. पेड़ तो पेड़ है. autumn तो autumn ही है. columbia university तो columbia university ही है. मैं भी वोही का वोही हूँ.

नज़रों में जरूर फर्क है…

Protected: निराशा का समाधान

September29

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दूर होना

July6

इधर कुछ दिनों से महसूस हो रहा है की धीरे धीरे भारत से दूर होता जा रहा हूँ और अमरीका के करीब. ये चीज़ पहले पाश्चात्य शहरों की खूबसूरती से शुरू हुई, लेकिन मालूम पड़ता है की अब ये tangible की जगह intangible बातों पर टिक रही है, और मुझे लगता है की ये तो खतरनाक है!

अगर मैं सड़कों पर फ़िदा हूँ, या अगर मैं नदियों और समुद्रतट पर वारा जाऊं, तो ठीक है. पेड़ और फूल कहीं भी खिल सकते हैं. इमारतें मुंबई और दिल्ली में खडी हो सकती हैं.

लेकिन अगर मैं अमरीकी जीवनशैली का कद्रदान बनता जाऊं, तो बड़ी भारी मुश्किल होगी. मुझे स्वतंत्रता अच्छी लगने लगी है, मुझे आदत होने लगी है की लोग मुझसे अच्छी तरह से बात करेंगे. मैं भूलने लगा हूँ की किसी समय मैं ऐसी जगह था जहाँ corruption , भीड़ भाड़ और इंसानी जीवन की क्षणभंगुरता सदैव उपस्थित – सदा स्वीकृत सत्य थे.

मुझे लगता है की मैं “धोबी का कुत्ता – न घर का, न घाट का” वाले पथ पर अग्रसर हूँ….

Top 10 signs that you are activated on a matrimonial site

June22

10) You stop completing your linkedin profile and start worrying about xyzmatrimony.com

9) While taking a picture you start thinking of making it a abcmatrimony profile pic rather than a FB profile pic.

8) You start noticing people’s surnames – something you never did in the past 27 years of your life.

7) You realize that now in addition to preparing, “Why do you want this job?” you also have to prepare, “What do I expect from my life partner?”

6) The girl who sits in the next cabin starts looking OK to you.

5) (Almost) Every ‘correct age’ unmarried women starts being judged from a is-she-ok-for-me point of view

4) You start realizing that all your ex-girlfriends weren’t that bad after all.

3) You moods begin alternating between being S*** scared and irrational exuberance(and I dont mean that in an Alan Greenspanish way)

2) Every time your mom calls up, you feel the consternation that she’ll either mention a new ‘rishtaa’ or ask, “Bhaiyyu, did you find someone on xyzmatrimony?”

1) You are undecided that which of the above 9 points should be ranked numero uno, for all of them are as weird and as true as it gets.

hagar

नहीं आयीं तुम

April27

नहीं आयीं तुम,

आज फिर से,
न कुछ लिखा ,
न कुछ बताया.
सब मन में छुपाया.
हे मेरी तुम,
क्यूँ हो ये राज़,
तुम्हारे मेरे बीच,
क्यों हो ये संबंध,
कडवे, संदेह से सींच?
* “हे मेरी तुम” केदार की अनेक रचनाओ का नाम है.

Protected: The origination of my passion – “Power Knowledge”

April12

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Feminism और ‘मुनिया की माँ’

October10

मेरे गाँव में हमारे यहाँ जो बाई काम करती है, उसका नाम है ‘ मुनिया की माँ’. मुनिया की माँ का असली नाम मेरे को नहीं पता, न ही मेरे घर वालों को पता है. वो बस मुनिया की माँ हैं. जब उसकी शादी नहीं हुई होगी, तो वो किसी ‘मुन्ना की बेटी’ रही होगी, शादी के बाद जब तक मुनिया का जन्म नहीं हुआ होगा, तब तक शायद वो ‘ रामू की बीबी’ रही होगी. अब क्यूंकि मुनिया का जनम हो गया है, तो भाई उसका नाम मुनिया की माँ नहीं होगा तो क्या होगा?

Feminism क्या है? क्या वो Miss Universe प्रतियोगिता की निंदा करना है? क्या वो ‘Fair and Lovely’ की बुराई करना है? क्या वो political suffragate है? क्या वो abortion का अधिकार है? वो क्या है? Feminism का सबसे पहला काम है मुनिया की माँ को ये ज्ञात करवाना की वो मुनिया की माँ बाद में है, और ‘रामो ‘ पहले.

विवाह

July14

तुम और मैं
सशंकित प्रतिनिधियों के चुने,
असीमित संभावनाओं
की कसौटी पर खरे,
लेकिन एक दुसरे से
डरे डरे.
भय से अधमरे.

 

[ सशंकित – unsure

प्रतिनिधियों – representative

असीमित संभावनाओं = infinite possibilities

कसौटी = stone with which a goldsmith ascertains the purity of gold

खरे = passed ]

कल और आज.

May6

 समय के दर्पण में खुद को तकता,
‘कल’ है वक्ता ; ‘आज’ है श्रोता,
निकल तरकश से प्रश्नोत्तर के शूल ,
‘आज’ है मेरा जर – जर होता .

पुरातन विचार हुंकार भरते,
नूतन कर्म के कारण परखते,
और व्यथित हो यथार्थ से फिर,
परिवर्तित दीवारों पे सर पटकते
[ वक्ता –  speaker
श्रोता – listener
तरकश – Arrow Case
प्रश्नोत्तर – Question and answer
जर – dilapidated, old, weak
पुरातन – old
हुँकार – war cry
नूतन – new
व्यथित – traumatised
यथार्थ – reality
परिवर्तित – that which has changed/transformed ]

अंतःद्वँद

March27

Ambivalent ideas clutter my mind and in their ruction, they leave me frail. On one side is the new modern lifestyle which cajoles me to lead a materialistic life in a metropolis. To take by force what I deserve, to make myself supreme in this battle of life. To be aggressive, to be a winner. To live that hectic life where I can contend myself by only the best. To be successful by any and every means necessary.
On other side is my education and family values. On the other side is what my parents always taught me and what I always believed in. To be humble and down to earth, to respect others and to care for their feelings. That small town mindset which prohibits me from doing a thousand things that I want to do.
And amidst these two contrary feelings, I’m utterly confused on which path to follow.

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My first Post

November22

Decadence is setting in. My ideas & ethics are dying and am everyday getting more and more materialistic.

A number of thoghts cross my mind everyday. This is an attempt to word my emotions on a gamut of things.

If you’re here to find some fun stuff, you’ll be dissapointed. This is meant to be more of a chronicle rather than an intellectual/entertainment portal!

However, if you’re here to see what have i been up to; you’re more than welcome.

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