बंद दरवाज़े,
आज खुले
एक अरसे बाद..
धूमिल हो गयी,
पर रेशमी परी,
की गुलाबी याद..
खुली तो आँखें,
पर क्या ही देखें,
‘साथ’ नहीं है साथ..
पुरानी बातें,
गुजरी रातें,
ख़त्म है उन्माद..
हम तो बोले,
वापस होलें,
काल कोठरी में पार्थ!
बंद दरवाज़े,
आज खुले
एक अरसे बाद..
धूमिल हो गयी,
पर रेशमी परी,
की गुलाबी याद..
खुली तो आँखें,
पर क्या ही देखें,
‘साथ’ नहीं है साथ..
पुरानी बातें,
गुजरी रातें,
ख़त्म है उन्माद..
हम तो बोले,
वापस होलें,
काल कोठरी में पार्थ!