पिछले साल बहुत सारे जाने पहचाने चेहरे महाकाल का ग्रास बन गए. मेरी नानी, कुनाल वर्मा, मोहित वर्मा.. मुझे कुछ कुछ विचलित करने लग गयी है काल की इच्छाएं.
अक्सर मैं अपने को सोचता पाता हूँ की अगर मेरा जीवन आज - अभी रुक जाये तो क्या वो सार्थक कहलाएगा? इस सवाल का जवाब मैं शायद दे भी दूं और चुप हो जाऊं. लेकिन मेरे मन में सवाल उठता है, अगर मेरे करीबी का जीवन रुक जाये तो? अम्मू, नाना या मेरी माँ? मुझे तब क्या ये दुःख होगा की मैं उन्हें समय नहीं दे पाया?
नानी के चार लड़के थे. लेकिन उनका पूरा जीवन अकेला ही बीत गया. कितनी बार मेरे को कहती थीं , ” अपनी माँ के साथ रहना, अजमेर में ही नौकरी कर लो”. नानी मम्मी को भी बतातीं थी की अपने पास ही रखना इस को. शायद अपने जीवन में पीछे मुड के देखने पे उन्हें लगता होगा की किसी भी बच्चे के साथ न रह पाना कितना बुरा है.
अब मेरी माँ वृद्धावस्था में प्रवेश कर रहीं है. घर पे केवल माता पिता ही हैं, हाँ गुलरभोज में जरूर बाकी भी हैं. लेकिन अगर वो गाँव न जायें तो क्या वो भी अकेली रहेंगी? क्या मेरा कोई कर्त्तव्य नहीं बनता उनकी ओर जब उन्होंने इतने साल मेरा इतना ख्याल रखा और मुझे किसी मुकाम पर पहुँचाया?
अगर विदेश चला गया तो गौरैया की तरह कुछ दिन आऊँगा और फिर उड़ जाऊँगा. जब तक मौका मिले परिवार के साथ रहने की मेरी तीव्र इच्छा है. जैसे ही नौकरी कुछ ठीक हो, मेरा विवाह हो, तो तुरंत सबको बुला लूँगा. अगर कोई न भी आये, तब भी ये ensure करूंगा की माँ कभी अकेली न हों…


please keep the promise that you have made with yourself about not leaving your mother ever alone….
I loved the line where you have compared yourself to गौरैया…
I certainly would.
Thank you for the appreciation.
Very few unknown people read my blog, By any chance do i know you?
No, you don’t know me but i know you…through dalvi…
and i am a regular reader of your blog and i quiet like it
Thank you for the appreciation! Your comment was responsible for me having a nice day today.
oh! nice to know that but if i can ask …how???
Because it feels really nice to see that some people appreciate what i write and what i think! So i felt nice in general today. Do you blog too?