आज कैसा ऊंचा और नीचा दिन निकला! सुबह bank का collections कैसे काम करता है, ये देखने निकल पड़ा. Auto से गया. ऑटो वाले से मैंने ठीक से बात की. जब उतर के पैसे दिए तो उसने कहा, “Sir, आप असली Gentleman हैं. ” मुझे ये ये बहुत अच्छा compliment लगा. एक अरसा हुआ जब किसी ने बिना किसी छुपी आकांक्षा के कुछ अच्छा कहा मेरे बारे में.

फिर collection agent के साथ निकल पड़ा. ये ऐसे लोग थे जिन्होंने 2 साल से पैसा नहीं दिया था. कुछ तो साफ़ बेईमान दिखे , कुछ बेचारे शरीफ भी थे. एक पान वाले एक पास गया जिससे पता चला की उसे फसाया हुआ है किसी ने. बेचारे के ऊपर कानूनी केस भी लगा दिया है ICICI ने ! दू:खी प्राणी ने पहले तो अपना मामला साफ़ किया फिर मेरे को cold drink भी पिलाई, मुफ़्त में. मैंने पुछा की भाई अगर तुमने लोन लिया ही नहीं था तो इतनी किश्त क्यूँ चुकी? वो बोला, ” सर दोस्त ने कहा था की बचा ले”. उसके अपने दोस्त ने उसे fraud केस में फसवा दिया और वो बेचारा उसी को बचाने चला है..

वापस आके दफ्तर में डांट पड़ी की मैंने काम नहीं किया है. मेरी कोई गलती नहीं लगी अपने को. पर कुछ कहा नहीं. Boss ने एक काम करने को कहा, मैंने कहा की सर ये काम दूसरी तरह से करना चाहिए. बॉस ने डांट दिया. मैंने अपनी बात समझाई जो आज field से सीख कर आया था, तो मान गए वो मेरी बात. मुझे अच्छा लगा की चलो आज इतनी मेहनत करने के बाद, कुछ तो ऐसा सीखा की discussion में अपना point defend कर सकूं.

वापस आ के देखा तो फिनलैंड की internship देने से मना कर दिया है. सोचा की कोई न, जीवन में अच्छी चीज़ें भी होती हैं और बुरी भी. आज दरवाज़ा बंद हुआ है, कल कोई और खुलेगा. भगवान् भी आखिर कितना काट सकता है मेरा?

और आखरी में साहब एक SMS आया जिसपे गौर फरमाएं - ” It is not the friend who should be perfect, it is the friendship that should be perfect” .. कितनी सही बात है , है न?
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छिप-छिप अश्रु बहाने वालों, मोती व्यर्थ बहाने वालों
कुछ सपनों के मर जाने से, जीवन नहीं मरा करता है
— गोपालदास ‘नीरज’

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