“Just because something is difficult, doesn’t mean we should not try. It only means that - we should try harder” रमन आर्य का ये status message पढके मुझे सहसा सत्य का ज्ञान हुआ . पिछले कुछ दिनों से मुझे अपने पर विश्वास नहीं था.. US जाने के दिन करीब आ रहे हैं और मुझे डर लग रहा था - कैसे घर जाऊँगा? कोई लेने नहीं आ रहा है, कुछ गड़बड़ हो गयी तो? अपना घर कैसे ढूँढूँगा manhattan में ? Computer programming कैसे करूंगा? Maths कैसे करूंगा ? नौकरी कैसे मिलेगी इत्यादि, इत्यादि….. डर ने आत्मविश्वास को ग्रहण लगा दिया था.
लेकिन मैं मूर्ख तो नहीं हूँ! भगवन के सहारे और अपनी मेहनत और बुद्धि के बल पर मैंने भी सफलताएँ पायीं हैं! CFA किया है, MBA किया है, नौकरी में बेहतरीन प्रदर्शन किया है, Clubs और societies का नेतृत्व किया है , और सबसे अच्छी बात अपना ऐसा व्यक्तित्व बनाया है की बहुत जन मेरी तारीफ करते हैं.
मैं अपनी तारीफों के पुल नहीं बाँध रहा, लेकिन अपने को दूसरों से कम क्यूँ समझूं? अगर maths नहीं आता तो सीख लूँगा! अगर Computer programming से फटती है, तो घंटों मेहनत कर कर के पता कर लूँगा! New york में 19 ,541 ,453 लोग रहते हैं, मैं भी अपना घर ढूंढ लूँगा ! हर साल २ लाख भारतीय अपनी नौकरी ढूंढते हैं, मैं भी ढूंढ लूँगा! साला किसी भी चीज़ से डरूं क्यूँ???
और अगर मुझ जैसा पढ़ा लिखा समझदार व्यक्ति -जो Architecture से linear algebra तक, और nietzche से Graphology तक जान सकता है - यदि मुझ जैसा व्यक्ति नूतन भविष्य से डरेगा, तो साला दुनिया का होगा क्या? हमेशा धरती पर रहना अच्छी बात है, अपने में घमंड न आने देना अच्छी बात है ….लेकिन अपने को दूसरों से कम आंकना तो बेवकूफी की चीज़ ही कहलाएगी.
नवु कहता था, ” अगर कोई चीज़ मुझसे हो जाएगी , तो मैं उसे क्यूँ करूँ?” उसकी बात अब मेरे समझ आती है. ये वैसे ही बात है जो अन्चालिया कहता है, “Run towards your fears.”
मैं क्यूँ रुकूँ धरती पे, जब मेरा ठिकाना तो असीमित अंतरिक्ष है????
——
” …and I search deep in my soul,
Beyond the doubt and the debris,
I’ve found out that all along,
There has been a king in me…
And I’m gonna Fly,
fly fly fly….”


best of luck bhai !!!
Thank you! You helped me a lot.