Oh me!

We are so small between the stars & so large against the sky. and lost in subway croud, I try to catch your eye …..

संगीता स्वरुप की कुछ कवितायेँ

June18

संगीता जी दिल्ली में रहती हैं और बिखरे मोती नाम का एक ब्लॉग रखती हैं. http://gatika-sangeeta.blogspot.com/ . सार्थक नाम है इनके ब्लॉग का ! इतनी सुन्दर और कोमल रचनायें पढ़ मन गद-गद हो गया. ये सभी कवितायेँ इनके ब्लॉग से ली गयीं हैं और इनके सर्वाधिकार संगीता जी के पास सुरक्षित हैं. मैं इन्हें केवल non -commercial तरीके से प्रस्तृत कर रहा हूँ…

http://gatika-sangeeta.blogspot.com/2011/03/blog-post_18.html पलाश

पलक पर जमी
शबनम की बूंद को
तर्जनी पर ले कर
जैसे ही तुमने चूमा
मेरी आँखों में
न जाने कितने
पलाश खिल गए ….

http://gatika-sangeeta.blogspot.com/2010/09/blog-post.html

खामोशियाँ
ठहर गयीं हैं
आज
आ कर
मेरे लबों पर

खानाबदोशी की
ज़िंदगी शायद
उन्हें
रास नहीं आई

http://gatika-sangeeta.blogspot.com/2010/07/blog-post_21.हटमल

तमन्ना ने तेरी
होठों पे उंगली
रख कर
जैसे ही कहा

“श्श्शश्श”

सारे मेरे ख्वाब
ठिठक कर
रुक गए…

http://gatika-sangeeta.blogspot.com/2010/03/blog-post_24.हटमल

कल्पना के
इन्द्रधनुष को
किसी क्षितिज की
दरकार नहीं

ये तो
उग आते हैं
मन के
आँगन के
किसी कोने में ….

posted under Emotion, poem
6 Comments to

“संगीता स्वरुप की कुछ कवितायेँ”

  1. On June 30th, 2011 at 12:36 am sangeeta swarup Says:

    वरुण जी ( भय्यू)

    आज अचानक ही अपने स्टेट्स से देख यहाँ आने का अवसर मिला ..और यहाँ अपनी कुछ रचनाएँ देख कर हतप्रभ रह गयी ..मुझे खुशी है कि आपको मेरी रचनाएँ पसंद आयीं …
    बस एक सुझाव देना चाहूंगी … यदि आप किसी भी रचना के नीचे टिप्पणी दे कर यह सूचित कर देते कि आप अपने ब्लॉग पर कुछ रचनाएँ लगा रहे हैं तो मुझे भी पता चल जाता … यदि कभी किसी के भी ब्लॉग से आप कुछ भी अपने ब्लॉग पर लगाएं तो आप अनुमति न ले पायें तो कम से कम सूचित कर दें …

    रचनाकार को अच्छा लगता है जब उसकी रचनाएँ पसंद कि जाती हैं .. ः)ः)

    शुक्रिया और शुभकामनायें

  2. On June 30th, 2011 at 9:12 am साधना वैद Says:

    सारी क्षणिकाएं एक से बढ़ कर एक हैं ! गागर में सागर भर देने की जैसी महारत आपको हासिल है संगीता जी वह अन्यत्र कहीं दुर्लभ है ! बहुत खूब ! मेरी बधाई स्वीकार करें !

  3. On June 30th, 2011 at 9:26 am rashmi prabha Says:

    वाह् इसे कह्ते हैन तहेदिल से सम्मन देना ….

  4. On June 30th, 2011 at 9:28 am bhaiyyu Says:

    संगीता जी, आपको सूचित न करने के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ.

  5. On June 30th, 2011 at 9:01 pm Anamika Says:

    Sangeeta ji ko bahut bahut badhayi.

  6. On July 2nd, 2011 at 12:13 am मनोज कुमार Says:

    स्ंगेीता जेी को पढ्ना हमेशा सुखद रहा है|

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