Oh me!

We are so small between the stars & so large against the sky. and lost in subway croud, I try to catch your eye …..

ये शब्द वही हैं – कुंवर नारायण

October18

यह जगह वही है
जहां कभी मैंने जन्म लिया होगा
इस जन्म से पहले

यह मौसम वही है
जिसमें कभी मैंने प्यार किया होगा
इस प्यार से पहले

यह समय वही है
जिसमें मैं बीत चुका हूँ कभी
इस समय से पहले

वहीं कहीं ठहरी रह गयी है एक कविता
जहां हमने वादा किया था कि फिर मिलेंगे

ये शब्द वही हैं
जिनमें कभी मैंने जिया होगा एक अधूरा जीवन
इस जीवन से पहले।

posted under Emotion, past, poem, present
2 Comments to

“ये शब्द वही हैं – कुंवर नारायण”

  1. On December 11th, 2011 at 10:24 pm nimisha mishra Says:

    gud poem….helped me in assignment…

  2. On December 11th, 2011 at 10:48 pm bhaiyyu Says:

    Great! Good to know I was of help.

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