Oh me!

We are so small between the stars & so large against the sky. and lost in subway croud, I try to catch your eye …..

मैं क्या करूँ ?

November21

अगर २२ मंज़िली ईमारत
कि सोलह माले पर भी
सर्दी कि धूप
मुझे ढूंढ कर गुदगुदा दे
तो मैं क्या करूँ ?

अगर रेल के अंदर बंद बंद भी
कुछ लाल पीले पतझड़ के निशाँ
मेरे muffler से आलिंगनबद्ध
मुझे जाने न दें ,
तो मैं क्या करूँ ?

अगर आज सुबह
तुम्हारी चाय कि गर्मी
इस सूखे दिन को
भर दें जिजीविषा से
तो मैं क्या करूँ ?

( Boston, 11/21/13 )

posted under Boston, English, love, Nature, poem
One Comment to

“मैं क्या करूँ ?”

  1. On December 2nd, 2013 at 3:49 am Surabhi Says:

    एक सुंदर अभिव्यक्ति …

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