Oh me!

We are so small between the stars & so large against the sky. and lost in subway croud, I try to catch your eye …..

मुग़ल-ए-आज़म

June16

आज मुग़ल ए आज़म का गाना “प्यार किया तो डरना क्या” के कुछ अल्फाज़ मेरे मन से निकलते ही नहीं हैं.. गौर फरमाईये..


आज कहेंगे दिल का फ़साना*
जान भी ले ले चाहे ज़माना
मौत वही जो दुनिया देखे,
घुट घुट* कर यूँ मरना क्या?

[ फ़साना = story ; घुट घुट = suffocate ]
….
छुप न सकेगा इश्क हमारा .
चारों तरफ है उनका नज़ारा
पर्दा नहीं जब कोई खुदा से,
बन्दों से पर्दा करना क्या?*

जब प्यार किया तो डरना क्या? ”

[ When we cannot hide things from God, why hide things from humans? ]

शकील बदायुनी साहब ने ये बेहद कमाल की बात कही है – पर्दा नहीं जब कोई खुदा से, बन्दों से पर्दा करना क्या? – . This is akin to spirituality being served a la carte. कितनी आसानी से शायर अपनी बात कहते हैं. अगर हम भगवन से कुछ छुपा नहीं सकते, तो इंसानों से कुछ क्यूँ छुपाना? इस कथन के हजारों अभिप्राय हैं, जो की पाठक सोचे तो स्वयं ढूंढ लेंगे. साधू कवि, साधू!

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