Oh me!

We are so small between the stars & so large against the sky. and lost in subway croud, I try to catch your eye …..

खूबसूरत / बदसूरत

February24

कोई 8 – 10 साल पहले की बात है. शाम का वक़्त था और पापा फूलों को पानी दे रहे थे. मैं भी खडा था बाजू में. पाने की बूँदें जब पत्तों पे गिरी तो पापा ने कहा, “देखो फूल कितने खुश हैं और कैसे झूम रहे हैं!” . मैं उन दिनों अजीब सा था. कहा,” फूल खुश-वुश नहीं हैं . पानी उनपे गिरा तो जाहिर हैं यहाँ वहाँ हो गए वो पानी के वेग से.”

हमारे नज़रिए अलग थे.
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आज मेरे बॉस ने मुझे मेरी एक गलती का एहसास दिलाया. उनकी एक बात ठीक लगी, लेकिन दूसरी बात मुझे बहुत चुभी. फिर दुःखी दुःखी सा रेलवे स्टेशन पहुंचा. बांद्रा स्टेशन मुझे एक भद्दा कबाड़खाना प्रतीत हुआ. ट्रेन में लगा की कैसे भेड़ बकरी से लोग भरे हुए हैं. फिर विले परले स्टेशन पर वोही बुरी सी चीज़ लगी. बाहर सड़क भी गन्दी लग रही थी. कुछ अच्छा नहीं लगा.

अब अपने कमरे में बैठ, पापा की बात याद आ रही है. जहाँ पापा को खूबसूरती नज़र आ रही थी, वहीँ मेरे को कुछ ख़ास नहीं लग रहा था. आज तक मेरे को ट्रेन, बांद्रा स्टशन और मेरे घर के सामने वाली सड़क बुरे लगने लगे- जो कल तक मुझे प्रसन्नचित्त कर देते थे.

न ट्रेन बुरी है, न स्टेशन बुरा है और ना ही मेरी सड़क इतनी गन्दी है. बस मेरी नज़र अलग है

“Beauty lies in eyes of the beholder” – proverb

posted under learning
3 Comments to

“खूबसूरत / बदसूरत”

  1. On March 26th, 2009 at 2:19 pm Charul Says:

    Varun, a deep thought written very simply!! :)

  2. On March 26th, 2009 at 11:53 pm bhaiyyu Says:

    thanks!

  3. On February 6th, 2012 at 10:40 am Simer Says:

    maar hi dala bhaiyyu ne!!

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